मेडूसा: एक पुजारिन, एक स्त्री और एक अन्याय की अमर कथा
मेडूसा: एक पुजारिन, एक स्त्री और एक अन्याय की अमर कथा ग्रीक मिथकों में कुछ कहानियाँ राक्षसों के बारे में नहीं होतीं, वे कहानियाँ होती हैं — राक्षस बना दी गई स्त्रियों की। मेडूसा ऐसी ही एक कहानी है। क्यों बनी मेडूसा पुजारिन मेडूसा जन्म से राक्षसी नहीं थी। वह एक साधारण, लेकिन असाधारण सौंदर्य वाली स्त्री थी। उसका मन शांत था, स्वभाव कोमल और आत्मा पवित्र। वह देवी एथेना (Athena) की भक्त थी — ज्ञान, बुद्धि और पवित्रता की देवी। एथेना का मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं था, वह मर्यादा, संयम और आत्मनियंत्रण का प्रतीक था। मेडूसा ने स्वेच्छा से अपना जीवन उसी देवी को समर्पित किया और वह पुजारिन बनी। पुजारिन बनना उसके लिए सम्मान था, लेकिन साथ ही एक कठोर नियम भी — जीवन भर संयम और पवित्रता। मेडूसा का सौंदर्य मेडूसा का सौंदर्य केवल बाहरी नहीं था, लेकिन उसकी सुंदरता की चर्चा पूरे ग्रीस में थी। उसकी आँखें गहरी और चमकदार थीं, जैसे समुद्र की लहरों में छिपा आसमान। उसकी नाक संतुलित और कोमल थी, चेहरा ऐसा जैसे किसी मूर्तिकार ने ध्यान से गढ़ा हो। उसके बाल — लंबे, घने और चमकदार। जब हवा उन्हें छूती, तो लगता जैसे रेशम...